घडी इम्तिहान की
उस शाम को सोंचा था जब इस पल के बारे में,
सोंचा था अभी दूर हैं घडियाँ मुकाम की.
कब बीत गया वक्त कुछ ना खबर हुई,
लगता है ऐसा जैसे वो कल ही कि शाम थी.
लो...फिर आ गयी घडी इम्तिहान की.
# नितिन
जिन्दगी के अनगिनत रंगों का संकलन
हँसी-मजाक, सुख-दुःख, यारी-दोस्ती,भूली बिसरी यादें, आस-पास के विभिन्न मुद्दों
पर मेरे विचार...और भी ना जाने क्या-क्या.....
उस शाम को सोंचा था जब इस पल के बारे में,
और भी चीजें बहुत सी लुट चुकी हैं दिल के साथ,
क्यों मैं, क्या मैं, क्या मेरा मन ?

मैने,
मिले ज़िन्दगी मे चाहे ठोकरे कई,
हिन्दी ब्लोग लिखने का सन्कल्प करीब चार महीने पहले लिया था जब मुझे पता लगा था कि हिन्दी मे भी ब्लोग लिखे जा सकते है और मैने हिन्दी चिट्ठे पढने शुरु किये और तब से बस बाकी लोगो के ब्लोग पढ कर काम चला रहा था। वैसे अगर मुझे बोलने और लिखने दोनो के मामले मे हिन्दी और अन्ग्रेजी मे से किसी एक को चुनना हो तो मै हिन्दी को ही प्राथमिकता देता हू, पर यहा इन्टरनेट पर (या कहे कम्प्यूटर पर)हिन्दी टाइप करने मे बडी समस्या आती है और वैसे भी हम ठहरे पक्के आलसी सो अपने अन्ग्रेजी ब्लोग के करीब ६ महीने बाद यह हिन्दी ब्लोग शुरु हो रहा है..इन चार पँक्तियो के साथ...