ओणम
तो केरल के वो ओणम आज तक याद हैं,वहाँ की प्रसिद्ध नौका दौड तो नही देखी पर जो रीति रिवाज और परम्पराएं, खाना-पीना था वो आज तक याद है.
जिन्दगी के अनगिनत रंगों का संकलन
हँसी-मजाक, सुख-दुःख, यारी-दोस्ती,भूली बिसरी यादें, आस-पास के विभिन्न मुद्दों
पर मेरे विचार...और भी ना जाने क्या-क्या.....
कल उषनीश ने एक शेर सुनाया था...क्या था वो तो मैं भूल गया पर अन्तिम दो शब्द याद रह गये जो थे...तो क्या..आज क्लास में बैठे बैठे इसी पर तुकबन्दी की...
यह कविता मुझे बहुत दिन पहले mail forward मै प्राप्त हुई थी..मुझे बहुत पसंद आई और इसे पढ कर मैं खूब हँसा. क्योंकि तब मैं हिन्दी ब्लोग नही लिखता था, अतः मैने इसे अपने अन्ग्रेजी ब्लोग पर जस का तस चिपका दिया था...आज सोंचा के क्यों न यहा भी इसे चिपका ही दिया जाए.इसके रचियता का नाम मालूम नही है..अगर आप जानते हों तो कृपया बताएं..