Friday, December 30, 2005

सुर्खियों में....

IISc पर हमला
भारतीय विज्ञान संस्थान पर परसों रात हुए आतंकवादी हमले को देश् की बौद्धिक संपदा पर हमले के रूप में देखा जा सकता है ...साथ ही ये इस और भी संकेत करता है, कि आतंकवादी अब राजनैतिक और धर्मिक निशानों के अलावा अन्य निशाने भी ढूंढ रहे हैं...
आज विश्व में भारतीय वैज्ञानिकों, प्रबंधकों और तकनीकी विशेषज्ञों को जो सम्मान प्रप्त है, वो IISc जैसे संस्थानों की ही देन है, अतः कोई आश्चर्य नही कि आतंकवादी इन्हें निशाना बनाने का प्रयास करें..
IIT दिल्ली के प्रो.पुरी को श्रृद्धांजली


आमिर खान की शादी
आमिर खान और किरण राव की शादी मीडिया की सुर्खियाँ बनी हुई है, पर एक और शख्स जो इस शादी से सबसे ज्यदा आहत(या प्रभावित) हुआ होगा, उस पर किसी का ध्यान नही गया, आमिर की पहली बीवी, रीना. उन्होने आमिर से तब शादी की थी, जब आमिर सुपरस्टार नही थे, और फिल्मी दुनिया में उनके पैर जमें नही थे, लगान के निर्माण के समय भी रीना ने आमिर की कम्पनी को पूरी तरह संभाला था.दोनो का तलाक कुछ समय पहले हुआ. बडा आश्चर्य होता है कि कोई कैसे १६ साल एक साथ रहने के बाद एक दूसरे को छोड सकता है.
अभी २-३ दिन पहले दैनिक भास्कर में इस पर जय प्रकाश चौकसे ने अच्छा लेख लिखा था

Friday, December 23, 2005

वर्ष २००५ में पढी गई पुस्तकें

आज अवलोकन-२००५ के अंतर्गत, पाठ्यक्रम के अतिरिक्त वे पुस्तकें जिन पर हाथ साफ करने में सफल हुआ...

Life of Pi by Yann Martel

Da vinci Code by Dan Brawn

गुनाहों का देवता कृति धर्मवीर भारती

गोरा कृति रवीन्द्र नाथ टैगोर

Four Blind Mice by James Patterson

*Harry Potter & Half Blood Prince by J K Rowling

State of Fear by Michale Crichtone

Deception Point by Dan Brawn

*Angels & Damons by Dan Brawn

*Digital Fortress by Dan Brawn

A Thousand Suns by Dominique Lappire

O Jerusalam by Dominique Lappire & Larry Collins

Devil's Alternative by Fredrick Forsyth

मेरा गाँव, मेरा तीर्थ कृति अन्ना हज़ारे

Out of my Confort Zone by Steve Waugh

Sony by John Nathan

Rage by Jonathan Killerman

आखिरी दो किताबें अभी चल रही हैं, २-४ दिन में खतम हो जायेंगी.
जिन किताबों के आगे * चिन्ह लगा हुआ है उनकी सिर्फ Soft Copy उपलब्ध थी...पर चूँकि पढना जरूरी था...सो दो-दो तीन-तीन दिन तक कम्प्यूटर जी के साअमने आँखें गडाए बैठे रहे ;)
उम्मीद करता हूँ कि २००६ के लिये ये सूची और भी लम्बी होगी

Thursday, December 22, 2005

अवलोकन-२००५

वर्ष २००५ बीत रहा है...आखिरी ८-९ दिन बचे है, और जिधर देखो उधर अलविदा २००५ का शोर सुनाई दे रहा है.मैंने सोंचा क्यों न खुद भी २००५ में अपनी आप बीती का अवलोकन किया जाये और देखा जाये कि कैसे बीता ये साल...

सबसे पहली बात तो, यह साल सही मायनों में मेरे लिये घुमंतू साल रहा, इस साल जितना घूमा उतना पहले कभी नही. झारखंड, उडीसा, आंद्रप्रदेश ,मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ और खुद अपने राजस्थान के कई हिस्से नाप डाले.
साल शुरू हुआ, झारखंड में चाईबासा के एक वन विभाग के विश्राम गृह से, जहाँ की बिजली, बिल न भरे जाने के कारण काट दी गई थी, याने ३१ दिसंबर २००४ की रात को(और १ जनवरी २००५ की सुबह) हम निपट अंधेरे में थे...फिर एक हफ्ता राँची रह कर वापस भोपाल में तीसरा Term पढाई की. अप्रेल मध्य से फिर निकले Organisational Training-I के लिये. उडीसा के ७-८ जिले और मध्यप्रदेश में शहडोल. फिर जुलाई से चौथा Term और फिर सितम्बर अंत में Organisational Training-II के लिये, पहले उदयपुर और आसपास, फिर राँची, भुवनेश्वर, हैदराबाद, रायपुर, गुजरात आदि....
धन्यवाद IIFM इन सब जगहों और यहाँ के लोगों को नजदीक से देखने का मौका देने के लिये, अभी तो एक ही मूल मंत्र है, छात्र जीवन में जितना घूम सकते हैं, घूम लो, पता नही, (अ)कल हो न हो.
इसी के चलते करीब १८-२० साल बाद फिर नाथद्वारा जाकर श्रीनाथ जी के दर्शन पाये, उसके पहले मेरा मुंडन यही हुआ था, शायद सन ८३-८४ में फिर कभी जाने का मौका नही लगा. जून में अपनी उडीसा यात्रा के दौरान जगन्नाथ पुरी जाकर भगवान जगदीश के दर्शन भी पाये. कोणार्क का प्रसिद्ध सूर्य मंदिर देखा तो खारे पानी की मशहूर चिल्का झील भी,हैदराबाद की चारमिनार, तो उदयपुर के पास कुम्भलगढ का किला जहाँ महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था....
और हाँ , इसी के साथ जिन्दगी में पहली बार कुछ कमाया. वैसे सही मायनों में कमाई नही कह सकते, था यह अपनी दो Organizational Trainings का Stipend... पर था तो मेहनत का पैसा, खुशी बहुत हुई मुझे.

वैसे तो ब्लोग शब्द वर्ष २००४ में NET पर सर्वाधिक चर्चित शब्द रहा था, पर अपना तो यह इसी साल हुआ. जनवरी में अपनी अंग्रेजी बकवास से शुरुआत की और जुलाई आते आते इस हिन्दी इन्द्रधनुष में रंग भरे(वैसे २००४ में IIFM Blog पर थोडा बहुत लिखा था)..
वैसे लिखने की Frequency उतनी ही रही जितनी मध्य प्रदेश के गाँवों में बिजली की रहती है, पर फिर भी मुफ्त बिजली की तरह ,हिन्दी चिट्ठाकारों के विचार, कहानिया, लेख, कविताओं और टिप्पणियों की सूरत में हमें मुफ्त में पढने को तो मिले.....

घर को इस साल खूब Miss किया...सबसे लंबा अर्सा जो घर पे बीता वो था ७-८ दिन, जून अंत में, अन्यथा १-२ दिन से ज्यदा का ट्रिप कोई नही रहा, वो भी खुशकिस्मती क्योंकि भोपाल से घर जाने में ४-५ घंटे ही लगते हैं. बाकी बडे त्यौहार याने दिवाली और दशहरा, बाहर ही मनाने पडे. दिवाली मनी हैदराबाद में...हाँ, जन्मदिन जरूर भाई के साथ उदयपुर में खूब मजे में बीता, पूरा उदयपुर घूमा उस दिन.

साल का बडा आर्थिक नुकसान , मोबाइल, जनवरी में हाथ में आया और सितम्बर में गायब...:((

पढाई के मोर्चे पर ज्यों के त्यों...साल के शुरू में क्लास में जो Rank थी , अंत में भी कमोबेश वही रही (क्या रही, ये नही लिखूंगा ;-) )

अभी इतना ही, आगे और कुछ ध्यान आया तो लिखूंगा...

Tuesday, December 13, 2005

अपनी 'खोल' से बाहर...

बहुत दिनों से मैने कोई किताब नही पढी. २ महीने से बाहर होने की वजह से समय भी नही मिल पाता था...बीच में पाउलो कोहेलो की "द अल्केमिस्ट" पढी थी, पर वो मैने पहले ही पढी हुई थी...इसके अलावा सुरेन्द्र मोहन पाठक के एक्-दो उपन्यास ट्रेन में पढे थे, पर कोई serious reading नही हुई थी.

कल स्टीव वा की आत्मकथा,"आउट आफ माय कम्फ़र्ट जोन" (Out of My comfort Zone) हाथ लगी है, उसे निपटा रहा हूँ, इस सप्ताह में खत्म करने का मानस बनाया है.हिन्दी में शायद इसका मतलब होगा, "अपने सुरक्षा कवच(या 'खोल') से बाहर"...

आमुख की दो पंक्तियाँ काफी अच्छी लगी,यहा चिपका रहा हूँ
"....I have come to learn that life wouldn't be as enjoyable if it was always easy, and that personal growth comes from having to move out of your comfort zone...."

मैने भी कई बार अनुभव किया है कि इस Comfort Zone से एक बार निकलना काफी मुश्किल होता है, किन्तु यदि निकल गये, तो काम मे बडा मजा आता है और सफलता की संभावना भी ज्यादा रहती है....लेकिन इस जंजीर को तोडना होता बडा दुष्कर है...

Wednesday, December 07, 2005

लगता है, समय खराब चल रहा है...पहले मोबाइल खोया था, उसके झटके से उबर कर अब नया लेने का विचार कर रहा था, कि कल कम्प्यूटर का मदरबोर्ड "उड" गया...यानि दो-ढाई हजार का खर्च फिर सर पे...वारंटी भी दो महीने पहले निकल चुकी है...:(..सारा वित्तीय इंतजाम गडबड हो गया .
खैर, वापस IIFM पहुँच गये हैं, फिर वही पुरानी दिनचर्या और जिन्दगी...ऊपर से इस बार शेड्यूल बहुत 'टाइट' है...