Wednesday, January 04, 2006

सिगरेट के धुएं का छल्ला उडा के....

कुछ महीने पहले एक आदेश जारी हुआ था(शायद केन्द्र सरकार द्वारा), कि बडे परदे पर धूम्रपान दिखाया जाना प्रतिबंधित किया जायेगा.
इसे लागू करने की तारीख भी घोषित की गई थी(शायद २ अक्तूबर २००४ से). फिल्म वालों ने काफी हो हल्ला भी मचाया था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रश्न भी उठा था लेकिन सरकार अडी रही थी और आदेश वापस नही हुआ था..
लेकिन भारत देश के अन्य असंख्य कानूनों क़ी तरह इसका भी अनुपालन करने का शायद किसी का कोई विचार है नही...अभी २-४ दिन पहले 'एक अजनबी' देख रहा था, अर्जुन रामपाल धडल्ले से छल्ले उडा रहे थे....और भी कई फिल्में होंगी, जो मैने नही देखी
कुछ सवाल उठते हैं...
जब कानून के पालन की कोई मंशा नही होती , तो बनाने की खुजली क्यों चलती है? किसी ने कहा था इस तरह का कानून बनाने को? या और कोई कारण था (सिगरेट कंपनियों से मोटा चंदा वसूलना था?)
अगर उल्लंघन हो रहा है, तो सजा क्या हो?
परदे पर धूम्रपान दिखाया जाना ज्यादा आपत्तिजनक है, या 'गरमागरम' सीन?

Sunday, January 01, 2006

नया साल, वही चाल ढाल....

नया साल आप सबको(और मुझे भी)बहुत बहुत मुबारक
ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि नये साल में मेरी और आप सबके मन की मुरादें पूरी हों
कँवारों की शादी हो जाये (मैं तो अभी Underage हूँ), बेरोजगारों को नौकरी मिले (वो तो मुझे भी चहिये, wish me luck),जिनके शटर गिर चुके हैं वे फिर से लिखना शुरू करें, हिन्दी ब्लोगर्स की संख्या हजार के पार पहुँचे, मै नियमित रूप से लिखता रहूँ, रोज नहाऊं, कम सोऊं....आदि आदि



कुछ और भी मुरादे और कल्पनाएं हैं, जरा गौर फरमाइये...

दादा टीम में बने रहे, और जब निकाला जाये, तो ससम्मान निकलें
उमा भारती के गुस्से से शिवराज सिंह चौहान बचे रहें
अबू सलेम इसी तरह मुम्बई पुलिस की मेहमान नवाजी कबूलता रहें, (तब तक राम गोपाल वर्मा उसकी जेल लाइफ पर भी २-४ फिल्में बना देंगे)
हिन्दी फिल्मों से कहानी , बिल्कुल कांग्रेस से नटवर सिंह की तरह गायब हो जाये और 'किसिग सीन' ग्रेग चैपल की तरह सुर्खिओं में बने रहें
हफ्ते में एक की दर से स्टिंग आपरेशन होते रहें
देश सूनामी, भूकम्प और मुम्बई बरसात जैसी आपदाओं से बचा रहे
सेंसेक्स १०-१२ हजार तक तो पहुँच ही जाये
टीम इंडिया पाकिस्तान सीरिज जीत कर आये
सट्टे और जुए जैसे सीरियल्स वापस बंद हो जाएं

अगर आपकी भी कुछ इच्छाएं है तो लिख डालिये...क्या पता, किसी दिन बाँकेबिहारी, गय्या चराते हुए, घूमते फिरते आपके ब्लोग पर पहुँच जायें, और दे दें.........एक अदद टिप्पणी....:))