tag:blogger.com,1999:blog-14338716.post114795144634069228..comments2008-05-20T07:27:42.693-07:00Comments on इन्द्रधनुष: जो मैने देखाNitin Baglahttp://www.blogger.com/profile/18440781901122132231noreply@blogger.comBlogger10125tag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1152166897800981202006-07-05T23:21:00.000-07:002006-07-05T23:21:00.000-07:00सामाजिक परिवर्तन की एक झलक आप यहाँ भी देख सकते हैं...सामाजिक परिवर्तन की एक झलक आप यहाँ भी देख सकते हैं...<A HREF="http://sulekha-sahitya.blogspot.com/" REL="nofollow">सुलेखा-साहित्य</A>।रणवीरhttp://www.blogger.com/profile/08405802286636020627noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1148915257821881562006-05-29T08:07:00.000-07:002006-05-29T08:07:00.000-07:00Hello Nitin Jho maine bhi bahut baar soocha aur y...Hello Nitin <BR/><BR/> Jho maine bhi bahut baar soocha aur yaad kiya, usko tumne bahut sundar tareeke se varnan keye ho, bahut accha laaga is post ko padke aur yeh bi kushi huan ki mere soch be kareeb kareeb vaise hi tha.<BR/><BR/>Badayi ho.<BR/><BR/>Tumhare Mitr<BR/>HemuHemuhttp://www.blogger.com/profile/11900296737144773688noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1148321631437766172006-05-22T11:13:00.000-07:002006-05-22T11:13:00.000-07:00nitin ji,vichar aapke bade achchhe he aur mene aap...nitin ji,<BR/>vichar aapke bade achchhe he aur mene aapki medha ki shakti ko abhi aur teevrata se mahsoos kiya he/<BR/>achchha he jamin se jude aadmi ki pehchan hii ye hoti he ki voh samay ki dhar me bahte huye bhi kinaro pe chhut gaye logo ke baare me kuchh karna chahta he/<BR/>bhaskarBhaskar Lakshakarhttp://www.blogger.com/profile/18112544818203939650noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1148029489691628252006-05-19T02:04:00.000-07:002006-05-19T02:04:00.000-07:00प्रेमलता जी, कडवा सच बयान किया है आपने...सागर जी, ...प्रेमलता जी, कडवा सच बयान किया है आपने...<BR/><BR/>सागर जी, आपकी टिप्पणी एवं विचारों से वंचित रह जाने पर दु:ख हुआ,स्पेम कमेन्टस से परेशान होकर यह ऑप्शन लगाया है,क्योंकि उनसे बचने का और कोई तरीका नही दिखता...इसीलिये फिलहाल तो यह ऑप्शन जीवित ही रख रहा हूं...आपके विचारों से कृपया एक नई टिप्पणी या पोस्ट के माध्यम से अवगत करायें..<BR/><BR/>प्रतीक जी, हम अभी भी भारत की तुलना विकसित देशों से नही कर सकते...उनकी और हमारी समस्याओं, हालातों और प्राथमिकताओं मे बहुत फर्क है, ऐसा मेरा मानना है...रफ्तार तेज किये जाने की जरूरत है,इस बात से मैं सहमत हूँ, परंतु यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि सभी लोग इस रफ्तार के भागीदार बन सकें,ऐसा ना हो कि समाज का एक बडा हिस्सा साथ दौड ही न पाये (आज भी भारत की ७०% जनसंख्या गाँवों में निवास करते है, metros में 'फील गुड' चल रहा होगा, लेकिन उन गांवों की स्थिति आज भी नही सुधरी है)<BR/><BR/>उन्मुक्त जी...'सपना क्या है, नयन सेज पर सोया हुआ आँख का पानी..'...टूटना-बिखरना तो चलता रहता है...हमारे सपने जरूर सच होंगे<BR/><BR/>e-Shadow जी, सुझाव बहुत अच्छा है, चर्चा हम बिल्कुल आगे बढा सकते हैं, लेकिन 'अनुगूंज'का आयोजन बडा जिम्मेदारी वाला काम है और मैं थोडा लापरवाह किस्म का इंसान हूं :( ...<BR/><BR/>प्रत्यक्षा जी, टिप्पणी का धन्यवाद, 'दिलचस्प मुद्दे' पर आपके भी विचार जानना चाहेंगे :)Nitin Baglahttp://www.blogger.com/profile/18440781901122132231noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1148016963627903552006-05-18T22:36:00.000-07:002006-05-18T22:36:00.000-07:00दिलचस्प मुद्दा है. सही लिखा आपनेदिलचस्प मुद्दा है. सही लिखा आपनेPratyakshahttp://www.blogger.com/profile/10828701891865287201noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1147979656636911682006-05-18T12:14:00.000-07:002006-05-18T12:14:00.000-07:00यह भी अनुगूँज का एक पूरा विषय बनने लायक है, अरे नि...यह भी अनुगूँज का एक पूरा विषय बनने लायक है, अरे नितिन भाई, क्यों न इस विषय पर चर्चा आगे बढायें।ई-छायाhttp://www.blogger.com/profile/15074429565158578314noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1147966351929328462006-05-18T08:32:00.000-07:002006-05-18T08:32:00.000-07:00मैने सपनो मे भारत को देखासपनो को टूटते देखाफिर सपन...मैने सपनो मे भारत को देखा<BR/>सपनो को टूटते देखा<BR/>फिर सपनो को जुड़ते हुऐ भी देखाउन्मुक्तhttp://www.blogger.com/profile/13491328318886369401noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1147965505638018602006-05-18T08:18:00.000-07:002006-05-18T08:18:00.000-07:00मैंने यह देखा कि इतना सब होने के बावजूद भारत में प...मैंने यह देखा कि इतना सब होने के बावजूद भारत में परिवर्तन की रफ़्तार अन्य विकसित देशों के मुक़ाबले काफ़ी कम है। इसे हर स्तर पर और ज़्यादा तेज़ किए जाने की ज़रूरत है, ताकि विश्व में भारत को इसके वांछित मुक़ाम तक पहुँचाया जा सके।Pratikhttp://www.blogger.com/profile/05916809002207296203noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1147959253242556082006-05-18T06:34:00.000-07:002006-05-18T06:34:00.000-07:00नितिन भाई, हमने बहुत कुछ देखा और आपके टिप्पणी के क...नितिन भाई, हमने बहुत कुछ देखा और आपके टिप्पणी के कॉलम में लिखा भी पर आपके वर्ड वेरिफ़िकेशन वाले कॉलम में गलत शब्द टाईप करने के बाद सब कुछ नष्ट होते भी देखा है, <BR/>फ़िर से टाईप करना पड़ेगा, आप से अनुरोध है कि वर्ड वेरिफ़िकेशन के ऑप्शन को निकाल देवें।Sagar Chand Naharhttp://www.blogger.com/profile/13049124481931256980noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1147957572247348492006-05-18T06:06:00.000-07:002006-05-18T06:06:00.000-07:00मैने किसी के सुख-दुख में मुहल्ले के सब लोगों को ...मैने किसी के सुख-दुख में मुहल्ले के सब लोगों को मदद करते देखा है और मैने पड़ौसी को पड़ौसी के द्वारा ना पहचानते हुए भी देखा है।<BR/>प्रेमलता पांडेMAN KI BAAThttp://www.blogger.com/profile/01063635787323676714noreply@blogger.com