tag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1145785334937653932006-04-23T02:39:00.000-07:002006-04-23T02:42:14.953-07:00एक अदद मकान<span style="font-family:trebuchet ms;">पिछले ८-१० दिन से नवाबों के शहर हैदराबाद में हूं...रोजी रोटी, याने नौकरी, घर से बहुत दूर खींच लायी है.नया शहर , नयी नौकरी और नये लोग...अभी हमारे सामने सबसे बडी समस्या है, नया घर ढूंढने की, फिलहाल एक होटल में रह रहा हूं पर ज्यादा दिन तो होटल में नही रह सकते ना..और कब तक अनिकेतन रहेंगे..</span><br /><br /><span style="font-family:trebuchet ms;">कल शनिवार, याने वीकेंड था, और पहला दिन, जब हम फ्री थे...तो निकल पडे फ्लेट/मकान ढूंढने...</span><br /><span style="font-family:trebuchet ms;">काफी धक्के खाये पर अभी कुछ मिला तो नही, पर कसम से...एक आध जगह तो क्या रोचक वाकयात हुए...<br />एक जगह..To-Let का बोर्ड देख कर घंटी बजायी...<br />एक छोटी लडकी ने, खिडकी में से ही पूंछा..."क्या है?"<br />"जी वो मकान..."<br />कुछ पूंछने भीतर गयी...फिर आयी,<br />"हिन्दू, या मुस्लिम?"<br />"जी हिन्दू"</span><br /><span style="font-family:trebuchet ms;">फिर कुछ पूंछने भीतर गयी...फिर आयी<br />"वेज्ज, या नोन वेज्ज...?"<br />मैं बोला...मै वेज्ज, मेरा दोस्त नोन वेज्ज<br />अब तक थोडा गुस्सा आने लगा था, पर मकान तो चहिये था...<br />वो लडकी फिर भीतर गयी, और इस बार एक बुजुर्ग महिला साथ आयी...<br />"फेमिली, या बेच्चलर..?"<br />"जी बेच्चलर.."<br />"नही जी, हम तो सिर्फ फेमिली को ही देते है.."<br />मन में इतना उबाल आ रहा था...पर, मुँह पर मुस्कान लाकर बोला..."आंटी, हम भी शरीफ बच्चे हैं"..<br />"वो ठीक है बेटा, पर हम फेमिली को ही देते है"...<br />मन ही मन हजार गालिया देते हुए वापस चल पडे...<br />इसी तरह २-४ जगह ठोकरे खायी, पर हमारा "बेच्चलर" होना किसी को रास नही आया...<br />अब कैसे समझायें इन्हे, अभी नौकरी लगी है, थोडा वक्त दीजिये, शादी भी हो जायेगी...पर अभी तो सबसे बडा सवाल ये है, कि तब तक हम हैदराबाद मे रहेंगे कहां....<br />है कोई जवाब?<br /><br /> </span>Nitin Baglahttp://www.blogger.com/profile/18440781901122132231noreply@blogger.com