tag:blogger.com,1999:blog-14338716.post-1152541867728972212006-07-10T06:49:00.000-07:002006-07-10T07:31:07.860-07:00अपना भी एक साल पूरा !!!अभी अभी ध्यान गया कि कल, ९ जुलाई २००६ को हमारे इस चिट्ठे ने भी अपनी उम्र का एक वर्ष पूरा कर लिया.<br /><br />जैसी कि रीत है, इस अवसर पर पुनरावलोकन करने की कोशिश की जाती है, तो पहली और महत्वपूर्ण बात तो ये कि इस एक वर्ष में काफ़ी कुछ सीखा. थोडा बहुत लिखा, और सबसे रसभरी बात, काफ़ी कुछ पढने को मिला.<br /><br />दूसरी बात ये कि चिट्ठों के माध्यम से काफ़ी लोगों को जाना, काफ़ी मित्र बने. <a href="http://sagarnahar.blogspot.com">सागर जी</a> से कुछ ही दिन पहले सक्षात भी मिल लिये....सही मायनों में पहली बार महसूस किया कि अंतरजाल नये लोगों को मिलाता है.हमारे सहकर्मी <a href="http://www.hemnathan.blogspot.com">हेमनाथन </a>से भी हमारा पहला परिचय ब्लोग(अंग्रेजी वाले) के माध्यम से ही हुआ था.<br /><br />लिखने की शुरुआत हमने कुछ कविताओं से की थी, लेकिन धीरे धीरे अपनी <strong>बकर</strong> की भडास भी यहीं निकालने लगे. वैसे लिखने में हमने कोई तीर नही मारे, लेकिन एक बात है कि चिट्ठा लेखन से हमारे सोंचने के तरीके में बदलाव जरूर आया (वैसे सोंचते हम पहले भी थे)..पर अब एक आदत ये हो गई है कि किसी भी घटना-दुर्घटना को देखते हैं तो उसके २-३ पहलू देख लेते हैं..और ये जरूर सोंचते हैं कि क्या इस बात को अपने चिट्ठे पर डाला जा सकता है...यदि हां तो कैसे(ये अलग बात है कि अक्सर ये खयाल ही होते हैं...आखिर हम ठहरे घोर आलसी)<br /><br />खुशी की बात ये भी है कि इस दौर में हिन्दी का प्रसार नेट पर जोरशोर से चलता रहा, हिन्दी चिट्ठों का आंकडा करीबन ५० से २०० के ऊपर पहुंच गया. हमें खुशी है कि ना सिर्फ़ हम इस प्रगति के साक्षी रहे, बल्कि कुछ हद तक इसमें भागीदार भी रहे :)<br /><br />एक दुख यह कि हिन्दी लिखने के बाद अपने अंग्रेजी चिट्ठे पर लिखना लगभग छूट गया. क्या करें, जब लिखने की इच्छा होती है, और हिन्दी लिखने का विकल्प सामने होता है तो अंग्रेजी लिखने की इच्छा ही नही होती. कई बार सोंच चुका वहां लिखने की, पर दिल की दिल में ही रह गई...<br /><br />और हां...नियमित लेखन..इस बारे में भी हम कई बार ठान चुके हैं कि नियमित रूप से लिखेंगे...(चाहे वो दैनिक हो या साप्ताहिक या पाक्षिक )...पर हाय रे आलस्य...आराम बडी चीज है..:)<br /><br />सौभाग्यवश इस पूरे साल में लगभग नियमित रूप से नेट कनेक्शन हमें मिलता रहा, जिसके चलते ये सब ऐश अपने चलते रहे...देखते हैं आगे कब तक ये चल पायेगाNitin Baglahttp://www.blogger.com/profile/18440781901122132231noreply@blogger.com