Sunday, April 23, 2006

एक अदद मकान

पिछले ८-१० दिन से नवाबों के शहर हैदराबाद में हूं...रोजी रोटी, याने नौकरी, घर से बहुत दूर खींच लायी है.नया शहर , नयी नौकरी और नये लोग...अभी हमारे सामने सबसे बडी समस्या है, नया घर ढूंढने की, फिलहाल एक होटल में रह रहा हूं पर ज्यादा दिन तो होटल में नही रह सकते ना..और कब तक अनिकेतन रहेंगे..

कल शनिवार, याने वीकेंड था, और पहला दिन, जब हम फ्री थे...तो निकल पडे फ्लेट/मकान ढूंढने...
काफी धक्के खाये पर अभी कुछ मिला तो नही, पर कसम से...एक आध जगह तो क्या रोचक वाकयात हुए...
एक जगह..To-Let का बोर्ड देख कर घंटी बजायी...
एक छोटी लडकी ने, खिडकी में से ही पूंछा..."क्या है?"
"जी वो मकान..."
कुछ पूंछने भीतर गयी...फिर आयी,
"हिन्दू, या मुस्लिम?"
"जी हिन्दू"

फिर कुछ पूंछने भीतर गयी...फिर आयी
"वेज्ज, या नोन वेज्ज...?"
मैं बोला...मै वेज्ज, मेरा दोस्त नोन वेज्ज
अब तक थोडा गुस्सा आने लगा था, पर मकान तो चहिये था...
वो लडकी फिर भीतर गयी, और इस बार एक बुजुर्ग महिला साथ आयी...
"फेमिली, या बेच्चलर..?"
"जी बेच्चलर.."
"नही जी, हम तो सिर्फ फेमिली को ही देते है.."
मन में इतना उबाल आ रहा था...पर, मुँह पर मुस्कान लाकर बोला..."आंटी, हम भी शरीफ बच्चे हैं"..
"वो ठीक है बेटा, पर हम फेमिली को ही देते है"...
मन ही मन हजार गालिया देते हुए वापस चल पडे...
इसी तरह २-४ जगह ठोकरे खायी, पर हमारा "बेच्चलर" होना किसी को रास नही आया...
अब कैसे समझायें इन्हे, अभी नौकरी लगी है, थोडा वक्त दीजिये, शादी भी हो जायेगी...पर अभी तो सबसे बडा सवाल ये है, कि तब तक हम हैदराबाद मे रहेंगे कहां....
है कोई जवाब?

4 Comments:

At April 23, 2006 4:34 AM, Blogger Pankaj Bengani said...

मेरे पास सागरभाई का फोन नम्बर नही है. वे बडे दयालु हैं

:-)

 
At April 23, 2006 9:57 PM, Anonymous आशीष said...

भईये,

क्वांरा होने की ये सजा तो हम भुगत चुके है! जगह जगह धक्के खाकर परेशान होने के बाद हमने अपने मानव संसाधन विभाग को गुहार लगायी थी, उनकी गारंटी पर हमे घर मिला था !
कुंवारो पर सदियो से अत्याचर होते आये हैं। मै सोच रहा हू एक क्वारो के लिये आदोंलन शुरू किया जाये !

आशीष
अध्यक्ष विश्व कंवारा मण्च

 
At April 24, 2006 1:40 AM, Blogger Sagar Chand Nahar said...

मेरे प्रिय मित्र पंकज जी ( जो जानते हैं कि मैं बहुत दयालु हुँ) ने कहा है सो मैं कोशिश करता हुँ, आपके लिये आप मुझे मेरे ईमेल पर संपर्क करें.sagarchand.naharएट जीमेल.कॉम

 
At April 25, 2006 1:44 AM, Blogger Nitin Bagla said...

पंकज जी, शुक्रिया सहानुभूति के लिये

आशिष जी, विश्व क्वांरा मंच के स्वघोषित अध्यक्ष जब बन ही गये हैं, तो कवांरों के लिये लड कर भी दिखाइये :D

सागर जी,धन्यवाद... जल्द ही आपसे संपर्क करूंगा

 

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