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Showing posts from October, 2005

कुछ तस्वीरें

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ये हैं राधेश्याम जो SPWD में ही कार्यरत हैं, फिर ज्योति, जो मेरी सहपाठी हैं और प्रोजेक्ट में मेरे साथ ही काम कर रही हैं और फिर विकास जो राधेश्याम के मित्र हैं और साथ ही रहते हैं...और ये चाय बडी अच्छी बनाते हैं :)


गरबों के जगमग, सजधज और धूम धडाका

उदयपुर के गरबे और खाना

नवरात्रा शुरू हो गये हैं और किस्मत से मैं इस बार उदयपुर में हूँ अपने प्रोजेक्ट के लिये. गुजरात, जो कि गरबा और डांडिया क उद्भव स्थल माना जाता है, यहाँ से पास ही है..सो यहाँ होने वाले गरबों पर गुजराती 'टच' साफ दिखाई देता है.और अच्छी बात यह , कि मेरे आफिस के सामने ही एक पंडाल सजा हुआ है...तो आजकल रात को ११ बजे तक बैठ कर डांडिया रास का रसास्वादन किया जाता है...

और उदयपुर का खान पान...क्या मिर्च खाते है यहाँ के लोग यार्..अपने तो आगे पीछे सब तरफ से धुआँ निकलने लगता है, ऊपर से तुर्रा यह कि जब टिफिन वाले से कहा कि भैया, खाने में मिर्च जरा कम डाला करो तो भाई बोला,"मिर्च ज्यादा कहाँ है...ये तो मीठी वाली मिर्च है "..ठीक है भाई, धन्यवाद तेरा जो तूने तीखी मिर्च नही खिलाई मुझे...

आजकल

काफी दिनों से यहाँ कुछ लिख नही पाया..शायद तब से, जब सोंचा था इ अब नियमित रूप से लिखूंगा...हुआ यह कि पहले तो हमारे collage LAN के cyber पहरेदार CYBEROAM महाराज को पता नही क्या सूझी...उन्होने ब्लोग से सम्बन्धित सभी साइट्स को porn category में डाल दिया...और सभी ब्लोगर साइट्स बंद...खैर उसके बाद हमें अपने दूसरे शैक्षणिक प्रशिक्षण(Organisational Training) पर निकलना था सो हमने भी कोई हाथ-पैर नही मारे.. और अब IIFM से बाहर हैं जहाँ मुफ्त नेट की सुविधा नही है सो कुछ लिख पाना कम ही संभव होता है..cyber cafe पर जाओ तो वहा हिन्दी में लिखने में असुविधा होती है..आजकल हम उदयपुर मं हैं...Society for the Promotion of Wastelands Development साथ . बायो डीजल से संबन्धित प्रोजेक्ट है..चार पाँच राज्य कवर करने हैं जिन्मे आंध्र प्रदेश्, छत्तीसगढ, उडीसा, झारखन्ड और गुजरात शामिल है..सो लगता है आने वाले दिन काफी धूम धाम से गुजरेंगे और घूमने का शौक तो है ही अपना... अभी २-४ दिन में उदयपुर देखा और घूमा..खुशी की बात यह है कि झीलों की इस नगरी की झीलें इस वर्ष करीब १० साल बाद पूरी भरी हैं अन्यथा अनावृष्टी की वजह से सब झी…