अवलोकन-२००५

वर्ष २००५ बीत रहा है...आखिरी ८-९ दिन बचे है, और जिधर देखो उधर अलविदा २००५ का शोर सुनाई दे रहा है.मैंने सोंचा क्यों न खुद भी २००५ में अपनी आप बीती का अवलोकन किया जाये और देखा जाये कि कैसे बीता ये साल...

सबसे पहली बात तो, यह साल सही मायनों में मेरे लिये घुमंतू साल रहा, इस साल जितना घूमा उतना पहले कभी नही. झारखंड, उडीसा, आंद्रप्रदेश ,मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ और खुद अपने राजस्थान के कई हिस्से नाप डाले.
साल शुरू हुआ, झारखंड में चाईबासा के एक वन विभाग के विश्राम गृह से, जहाँ की बिजली, बिल न भरे जाने के कारण काट दी गई थी, याने ३१ दिसंबर २००४ की रात को(और १ जनवरी २००५ की सुबह) हम निपट अंधेरे में थे...फिर एक हफ्ता राँची रह कर वापस भोपाल में तीसरा Term पढाई की. अप्रेल मध्य से फिर निकले Organisational Training-I के लिये. उडीसा के ७-८ जिले और मध्यप्रदेश में शहडोल. फिर जुलाई से चौथा Term और फिर सितम्बर अंत में Organisational Training-II के लिये, पहले उदयपुर और आसपास, फिर राँची, भुवनेश्वर, हैदराबाद, रायपुर, गुजरात आदि....
धन्यवाद IIFM इन सब जगहों और यहाँ के लोगों को नजदीक से देखने का मौका देने के लिये, अभी तो एक ही मूल मंत्र है, छात्र जीवन में जितना घूम सकते हैं, घूम लो, पता नही, (अ)कल हो न हो.
इसी के चलते करीब १८-२० साल बाद फिर नाथद्वारा जाकर श्रीनाथ जी के दर्शन पाये, उसके पहले मेरा मुंडन यही हुआ था, शायद सन ८३-८४ में फिर कभी जाने का मौका नही लगा. जून में अपनी उडीसा यात्रा के दौरान जगन्नाथ पुरी जाकर भगवान जगदीश के दर्शन भी पाये. कोणार्क का प्रसिद्ध सूर्य मंदिर देखा तो खारे पानी की मशहूर चिल्का झील भी,हैदराबाद की चारमिनार, तो उदयपुर के पास कुम्भलगढ का किला जहाँ महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था....
और हाँ , इसी के साथ जिन्दगी में पहली बार कुछ कमाया. वैसे सही मायनों में कमाई नही कह सकते, था यह अपनी दो Organizational Trainings का Stipend... पर था तो मेहनत का पैसा, खुशी बहुत हुई मुझे.

वैसे तो ब्लोग शब्द वर्ष २००४ में NET पर सर्वाधिक चर्चित शब्द रहा था, पर अपना तो यह इसी साल हुआ. जनवरी में अपनी अंग्रेजी बकवास से शुरुआत की और जुलाई आते आते इस हिन्दी इन्द्रधनुष में रंग भरे(वैसे २००४ में IIFM Blog पर थोडा बहुत लिखा था)..
वैसे लिखने की Frequency उतनी ही रही जितनी मध्य प्रदेश के गाँवों में बिजली की रहती है, पर फिर भी मुफ्त बिजली की तरह ,हिन्दी चिट्ठाकारों के विचार, कहानिया, लेख, कविताओं और टिप्पणियों की सूरत में हमें मुफ्त में पढने को तो मिले.....

घर को इस साल खूब Miss किया...सबसे लंबा अर्सा जो घर पे बीता वो था ७-८ दिन, जून अंत में, अन्यथा १-२ दिन से ज्यदा का ट्रिप कोई नही रहा, वो भी खुशकिस्मती क्योंकि भोपाल से घर जाने में ४-५ घंटे ही लगते हैं. बाकी बडे त्यौहार याने दिवाली और दशहरा, बाहर ही मनाने पडे. दिवाली मनी हैदराबाद में...हाँ, जन्मदिन जरूर भाई के साथ उदयपुर में खूब मजे में बीता, पूरा उदयपुर घूमा उस दिन.

साल का बडा आर्थिक नुकसान , मोबाइल, जनवरी में हाथ में आया और सितम्बर में गायब...:((

पढाई के मोर्चे पर ज्यों के त्यों...साल के शुरू में क्लास में जो Rank थी , अंत में भी कमोबेश वही रही (क्या रही, ये नही लिखूंगा ;-) )

अभी इतना ही, आगे और कुछ ध्यान आया तो लिखूंगा...

Comments

Sunil Deepak said…
नितिन जी आप के घूमने का पढ़ कर थोड़ी सी जलन हुई. घूमने के मौके तो मुझे भी बहुत मिलते हैं, पर भारत की इतनी सारी जगह देख पाने को तो मैं तरस ही जाता हूँ. इंद्रधनुष की शुरुआत तो अच्छी हुई है, ऐसे ही बनाये रखिये. सुनील
Nitin Bagla said…
आपके यत्रा विवरण पढ कर मुझे भी कुछ ऐसा ही लगता है....आप तो घूमने फिरने में 'इंटरनेशनल खिलाडी' हैं...हां, आपके खाने-पीने के विवरण पढ कर डर जाता हूं

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